श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन राजा उत्तानपाद का प्रसंग सुनाया, मां को बताया बच्चों की पहली गुरु
जौनपुर। नगर के विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने भागवत कथा के महत्व, अच्छे संस्कारों और माता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दूसरों का अमंगल चाहने वाले व्यक्ति का कभी मंगल नहीं हो सकता। इसलिए मनुष्य को सदैव सबके कल्याण की भावना रखनी चाहिए।
कथाव्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत का पाठ और श्रवण व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। साधु-संतों की संगति और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन मनुष्य को सदाचार की दिशा में प्रेरित करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन कुछ समय निकालकर भागवत के श्लोकों का पाठ करने और भगवान का स्मरण करने का आह्वान किया।
राजा उत्तानपाद की कथा ने किया भावविभोर
कथा के दौरान पं. रजनीकांत द्विवेदी ने राजा उत्तानपाद के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने मां और संतान के संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि मां बच्चे की पहली गुरु होती है। बचपन में मिलने वाले संस्कार ही उसके व्यक्तित्व और भविष्य की नींव तैयार करते हैं। परिवार में अच्छे संस्कार मिलने से बच्चे सही दिशा में आगे बढ़ते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, संस्कारों की कमी उन्हें गलत रास्ते पर ले जा सकती है। कथा के इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
उन्होंने कहा कि केवल ईंट-पत्थरों से बना मकान घर नहीं होता। गृहिणी और परिवार के सदस्यों के स्नेह, संस्कार एवं आपसी जुड़ाव से ही घर में वास्तविक अपनापन आता है। मनुष्य को अपने परिवार में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने के साथ दूसरों के प्रति भी सद्भावपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।
पूर्वजों के कल्याण और धर्म के प्रति जागरूकता का संदेश
कथाव्यास ने कहा कि परमात्मा की कृपा और सकारात्मक सोच से कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। धार्मिक कथाओं का उद्देश्य केवल श्रवण करना नहीं, बल्कि उनसे मिलने वाली सीख को जीवन में अपनाना भी है। उन्होंने श्रद्धालुओं को परोपकार, सदाचार और सभी के कल्याण की भावना के साथ जीवन जीने का संदेश दिया।
श्रीमद्भागवत कथा की मुख्य यजमान विमला सेठ हैं। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को कथा श्रवण के साथ धार्मिक और नैतिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इस अवसर पर अजय कुमार सिंह, चंद्रप्रकाश सोनी, डॉ. ब्रह्मेश शुक्ला, गंगाधर शुक्ला, अर्चना सेठ, अजीत सेठ, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ समेत गठना कोठी परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

















