✍️पत्रकार नागेंद्र माली आवाज न्यूज़
सिंगरामऊ, जौनपुर। सिंगरामऊ विद्युत उपकेंद्र से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और अनियमित विद्युत आपूर्ति से किसानों के साथ-साथ आम नागरिकों का जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो गया है। धान की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में बिजली की कमी किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है।
🔴क्षेत्र के खजुरन, ढेमा, बबुरा, फत्तूपुर, कठार, करनपुर सहित 10 से अधिक गांवों के लोग बिजली संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई-कई घंटे तक बिजली गुल रहती है। दिन और रात में बिना किसी पूर्व सूचना के कटौती होने से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
🔴धान की रोपाई के इस मौसम में किसानों को खेतों में लगातार पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन बिजली न मिलने से नलकूप और सिंचाई के अन्य साधन बंद पड़े हैं। मजबूरी में कई किसान डीजल पंप का सहारा ले रहे हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द नियमित बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो धान की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और उत्पादन में कमी आने की आशंका है।
🔴लगातार बिजली कटौती का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। भीषण गर्मी और उमस में ग्रामीणों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। छोटे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है, विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है और बिजली से चलने वाले घरेलू उपकरण बेकार पड़े हैं। कई स्थानों पर पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है क्योंकि पानी की व्यवस्था बिजली चालित मोटरों पर निर्भर है।
📍ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जबकि यही समय किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।
🔴क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों तथा प्रशासन से मांग की है कि सिंगरामऊ उपकेंद्र से जुड़े सभी गांवों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार नियमित एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही तकनीकी खराबियों को तत्काल दूर कर बिजली व्यवस्था में सुधार किया जाए।
🔴ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया तो वे संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के साथ शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए भी विवश होंगे। किसानों का कहना है कि समय पर बिजली मिलना केवल सुविधा नहीं, बल्कि उनकी खेती और आजीविका का प्रश्न है।








