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दिल्ली मार्च से पहले देशभर में निवारक गिरफ्तारियों और परिवहन पाबंदियों पर CPDRS ने जताई चिंता

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शांतिपूर्ण प्रदर्शन और आवागमन की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ : प्रमोद कुमार शुक्ला
✍️ नागेन्द्र माली पत्रकार आवाज में
दिनांक : 10 अक्टूबर 2026

नई दिल्ली। सेंटर फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स एंड सेकुलरिज्म (CPDRS) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली मार्च से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में की जा रही कथित निवारक गिरफ्तारियों, पुलिस कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।

संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले 48 घंटों के दौरान विभिन्न राज्यों से ऐसी खबरें सामने आई हैं, जिनमें दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलन के आयोजकों के खिलाफ निवारक गिरफ्तारियों तथा पुलिस गश्त की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
🛑विज्ञप्ति के अनुसार, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली प्रमुख यात्री एवं एक्सप्रेस ट्रेनों को कथित तौर पर रद्द किए जाने तथा दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद करने के अनुरोध से आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।

🛑CPDRS ने कहा कि शांतिपूर्ण सभा करने और देश में स्वतंत्र रूप से आवागमन करने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क), 19(1)(ख) और 19(1)(घ) के तहत प्रदत्त मौलिक स्वतंत्रताओं से जुड़ा है। संगठन के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों के लिए अनुमति देने से मनमाने ढंग से इनकार करना और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत व्यापक प्रतिबंध लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि रेलवे और मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंधों का असर केवल प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे छात्रों, दिहाड़ी मजदूरों, नौकरीपेशा लोगों और इलाज के लिए यात्रा करने वाले मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

संगठन ने लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
प्रमोद कुमार शुक्ला
इंचार्ज, पूर्वी उत्तर प्रदेश
सेंटर फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स एंड सेकुलरिज्म (CPDRS)

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