जौनपुर में भूमि सीमांकन (पैमाइश) की व्यवस्था अब पूरी तरह बदलने जा रही है!
भूमि विवादों के पारदर्शी और सटीक निस्तारण के लिए जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. की अध्यक्षता में जीएनएसएस (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) रोवर तकनीक पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
क्या बदलेगा इस नई तकनीक से?
±3 सेमी की सटीकता: पारंपरिक फीते या जरीब से होने वाली मानवीय गलतियों और ऊंचे-नीचे खेतों के कारण होने वाली त्रुटियों पर अब पूरी तरह लगाम लगेगी। सैटेलाइट आधारित निर्देशांकों से पैमाइश में अधिकतम सिर्फ 3 सेंटीमीटर तक का ही फर्क आ सकता है।
हर तहसील को मिला रोवर: उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 के तहत जिले की प्रत्येक तहसील को एक-एक जीएनएसएस रोवर उपलब्ध करा दिया गया है।
डिजिटल सुरक्षा: इस तकनीक से जुटाए गए डेटा को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर दोबारा जांच की जा सकेगी।
जिलाधिकारी ने सभी राजस्व अधिकारियों को इस तकनीक में निपुण होने के निर्देश दिए हैं और अधिवक्ताओं से भी इस पारदर्शी व्यवस्था में सहयोग की अपील की है।
अब न होगी पैमाइश में गड़बड़ी, न बढ़ेंगे भूमि विवाद!















