युवाओं के सपनों का सौदागर कौन और कब तक?
आख़िर कब तक उत्तर प्रदेश का युवा अपनी किस्मत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ परीक्षा देता रहेगा? एक तरफ लाखों छात्र अपनी जवानी किताबों के हवाले कर देते हैं। माँ अपने गहने बेचती है, पिता अपनी ज़रूरतें छोड़ देता है, बहन अपनी इच्छाएँ दबा देती है। पूरा परिवार एक उम्मीद पर जीता है कि इस बार बेटा या बेटी नौकरी पाएगा।
लेकिन फिर…
एक खबर आती है—”पेपर लीक!”
और उसी पल लाखों घरों में सन्नाटा छा जाता है।
यह केवल एक प्रश्नपत्र का लीक होना नहीं है, यह विश्वास का लीक होना है। यह मेहनत की हत्या है। यह उन सपनों पर हमला है जिन्हें गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने खून-पसीने से सींचते हैं। हर बार कहा जाता है—दोषियों को पकड़ लिया जाएगा। लेकिन युवा पूछता है—कब तक सिर्फ गिरफ्तारियाँ होती रहेंगी और अगला पेपर फिर लीक होता रहेगा?
यदि व्यवस्था में कहीं भी लापरवाही, मिलीभगत या भ्रष्टाचार है, तो उसे जड़ से खत्म करना ही होगा। कानून का डंडा इतना सख्त होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।
युवाओं!
याद रखो, तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत तुम्हारी एकता, तुम्हारी ईमानदारी और तुम्हारी लोकतांत्रिक आवाज़ है।
अपने अधिकार माँगो।
पारदर्शिता माँगो।
जवाबदेही माँगो।
हर परीक्षा के बाद यह सवाल पूछो कि सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी। हर भर्ती में निष्पक्षता की माँग करो। वोट देते समय रोजगार और ईमानदार भर्ती को मुद्दा बनाओ। भ्रष्टाचार को सामान्य मानने से इनकार कर दो।
क्योंकि…
जब युवा चुप रहता है, तब भ्रष्टाचार बोलता है।
जब युवा जागता है, तब इतिहास बदलता है।
उत्तर प्रदेश का युवा नौकरी की भीख नहीं माँगता।
वह किसी पर एहसान नहीं चाहता।
वह सिर्फ इतना चाहता है कि उसकी मेहनत का फैसला उसकी कलम करे, किसी बंद कमरे में हुआ भ्रष्ट सौदा नही।
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