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जौनपुर: गांजा बरामदगी के मामले में पुलिस को झटका, कोर्ट ने आरोपी को रिमांड पर लेने से किया इनकार, अब पीड़ित को मिल रही है धमकी

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जौनपुर।सरपतहां थाना क्षेत्र में कथित चार किलो गांजा बरामदगी का मामला लगातार उलझता जा रहा है। पुलिस द्वारा एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किए गए आरोपी को अदालत से बड़ी राहत मिलने के बाद अब आरोपी ने पुलिस और कथित गांजा तस्करों पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। न्यायालय ने मामले को प्रथम दृष्टया संदिग्ध मानते हुए आरोपी को न्यायिक रिमांड पर लेने से इनकार कर दिया और एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके बाद पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
जानकारी के अनुसार सरपतहां पुलिस ने 15 जून को अखिलेश सिंह नमक को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चार किलो गांजा बरामद करने का दावा किया था। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को न्यायालय में पेश किया, लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने गिरफ्तारी और बरामदगी की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए उसे रिमांड पर भेजने से साफ इनकार कर दिया।
रिहा होने के बाद आरोपी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि वह लंबे समय से क्षेत्र में खुलेआम हो रही गांजा तस्करी के खिलाफ अभियान चला रहा था। उसने कथित तौर पर देशी शराब की दुकान के पास हो रही गांजा बिक्री का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था। आरोपी का आरोप है कि इसी से नाराज होकर पुलिस और गांजा तस्करों की मिलीभगत से उसे झूठे मुकदमे में फंसा दिया गया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसके घर के पीछे एक बोरे में गांजा रखवाकर उसे गिरफ्तार किया गया। उसने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के कुछ ही देर बाद उस व्यक्ति को भी हिरासत में लिया था, जिसे क्षेत्र में लोग वास्तविक गांजा विक्रेता के रूप में जानते हैं। लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया जबकि उसका चालान कर दिया गया। पीड़ित का कहना है कि यदि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करती तो असली तस्कर के खिलाफ भी कार्रवाई होती।
आरोपी ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जमानत पर रिहा होकर घर लौटते समय कथित गांजा तस्कर और थाने के एक हिस्ट्रीशीटर ने उसे गोली मारने की धमकी दी। उसने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा मुहैया कराने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
उधर न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं पुलिस की ओर से अभी तक आरोपी द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल कोर्ट के रुख, आरोपी के गंभीर आरोपों और कथित धमकी की घटना ने इस मामले को जिले में चर्चा का विषय बना दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में आखिर कौन सच बोल रहा है और पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर क्या निकलकर सामने आती है।

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