सपा के मौजूदा एमएलसी आशुतोष सिन्हा और भाजपा के केदारनाथ सिंह के साथ युवा शक्ति संघ के अध्यक्ष सुनील यादव की दावेदारी भी चर्चा में
वाराणसी। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस बार कई उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण चर्चा में है। समाजवादी पार्टी के मौजूदा एमएलसी आशुतोष सिन्हा, भारतीय जनता पार्टी के केदारनाथ सिंह और युवा शक्ति संघ के अध्यक्ष सुनील यादव समेत कुल 24 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में चुनावी मुकाबले में विभिन्न प्रत्याशियों की भूमिका और स्नातक मतदाताओं का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन प्रमुख दावेदारों पर निगाहें
वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने आशुतोष सिन्हा पर भरोसा जताया है, जबकि भाजपा की ओर से केदारनाथ सिंह चुनाव मैदान में हैं। वहीं, युवा शक्ति संघ के अध्यक्ष सुनील यादव भी इस चुनाव में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। तीनों उम्मीदवारों के साथ अन्य प्रत्याशी भी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश में हैं।
स्नातक मतदाताओं के बीच शिक्षा, रोजगार, युवाओं के अवसर और अन्य स्थानीय समस्याएं चुनावी चर्चा के प्रमुख विषय हो सकते हैं। उम्मीदवारों के सामने अपनी प्राथमिकताओं और योजनाओं को मतदाताओं तक पहुंचाने की चुनौती है।
24 उम्मीदवारों के बीच चुनावी मुकाबला
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 24 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के अतिरिक्त अन्य उम्मीदवार भी चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे में चुनाव का परिणाम विभिन्न उम्मीदवारों को मिलने वाले समर्थन पर निर्भर करेगा।
चुनाव में किसी प्रत्याशी की स्थिति का आकलन केवल राजनीतिक दल या संगठन के आधार पर नहीं किया जा सकता। मतदाताओं की प्राथमिकताएं, उम्मीदवारों का जनसंपर्क और उनके मुद्दे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होनी है। मतदान के बाद आने वाले परिणाम से स्पष्ट होगा कि स्नातक मतदाताओं ने किस उम्मीदवार पर भरोसा जताया है।
फिलहाल आशुतोष सिन्हा, केदारनाथ सिंह और सुनील यादव समेत सभी उम्मीदवारों की दावेदारी चुनावी चर्चा का हिस्सा है। चुनाव परिणाम को लेकर मतदाताओं और राजनीतिक दलों की निगाहें मतदान पर टिकी हैं।









