प्रभु श्री राम की चरण पादुका सिर पर धर अयोध्या लौटे भरत, नम आँखों से गूंजा जयकारा

शाहगंज। श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में नई आबादी स्थित भव्य रामलीला मैदान में चल रहे पावन रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन मंच पर ऐसे मार्मिक और हृदयविदारक दृश्यों का जीवंत मंचन हुआ, जिन्हें देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। समिति के अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल की कुशल देखरेख एवं संरक्षण में आयोजित इस अभूतपूर्व मंचन की शुरुआत मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पिता राजा दशरथ के दाह संस्कार के अत्यंत दुखद और शोकपूर्ण प्रसंग से हुई, जिसने पूरे पंडाल को भावुक कर दिया।इसके उपरांत मंच पर भरत का निषादराज पर क्रोध, भरत-निषादराज संवाद और भरत के चित्रकूट गमन के एक से बढ़कर एक दृश्य प्रस्तुत किए गए। कलाकारों की सजीव अदायगी ने दर्शकों को त्रेता युग की याद दिला दी। आगे के क्रम में भारद्वाज संवाद, लक्ष्मण का रोष, अत्यंत प्रतीक्षित एवं भावुक भरत-राम मिलन तथा मर्मस्पर्शी भरत-राम संवाद का ऐसा जीवंत अभिनय पेश किया गया कि दर्शक अपनी सुध-बुध खो बैठे। जब भरत जी ने प्रभु श्री राम की पवित्र चरण पादुकाओं को अपने अश्रुपूरित नेत्रों से लगाकर सिर पर धारण किया और अयोध्या के लिए प्रस्थान किया, तो पूरा वातावरण ‘जय श्री राम’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।इस धार्मिक अनुष्ठान में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए मुख्य अतिथि क्षेत्राधिकारी प्रतिमा वर्मा ने मंच पर पहुंचकर माता जानकी और प्रभु श्री राम की विधि-विधान से आरती उतारी और उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर सीओ प्रतिमा वर्मा ने अपनी आत्मीय और प्रेरणादायक बात रखते हुए कहा कि भगवान श्री राम का पावन जीवन-चरित्र और उनके आदर्श आज के समाज में शांति, न्याय, मर्यादा और धर्म के सबसे बड़े प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज मेंसद्भाव और भाईचारे की मजबूत नींव पड़ती है।इस अवसर पर समिति के सभी पदाधिकारी, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।











