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बारिश में पकोड़े और स्नैक्स की चाहत भूख है या सिर्फ क्रेविंग? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए 4 संकेत

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बारिश के दिनों में क्या आपको पकोड़े, मिठाई या नमकीन स्नैक्स की तीव्र इच्छा होती है? न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. रिधिमा खमेसरा बताती हैं कि मानसून की यह चाहत अक्सर मौसम, मूड और आराम की भावना से जुड़ी होती है, न कि असली भूख से। हर साल पहली तेज बारिश आते ही पकोड़े, समोसे जैसे कॉम्फर्ट फूड अचानक बहुत आकर्षक लगने लगते हैं। लगता है जैसे मौसम ने ही भूख जगा दी हो। लेकिन कभी-कभी यह भूख नहीं, बल्कि मौसम से प्रेरित क्रेविंग होती है।

डॉ. खमेसरा के अनुसार, कुछ संकेत मदद कर सकते हैं यह समझने में कि आप वास्तव में भूखे हैं या सिर्फ बारिश के मूड और आराम की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ये संकेत प्रमाण नहीं बल्कि क्लू हैं।

1. हाल ही में खाने के बाद भी क्रेविंग आ जाती है

शारीरिक भूख धीरे-धीरे बढ़ती है, जबकि क्रेविंग अचानक आ सकती है—यहां तक कि पूरा भोजन करने के बाद भी। डॉ. खमेसरा बताती हैं कि मौसम से जुड़ी क्रेविंग कभी-कभी लंच के महज 40 मिनट बाद भी दिखाई दे सकती है। अगर पेट भरा है लेकिन बारिश देखकर कोई खास स्नैक याद आने लगे तो थोड़ा रुककर सोचें।

2. सिर्फ एक खास खाना ही चाहिए

असली भूख में कई विकल्प स्वीकार्य लगते हैं—सेब, बासी दाल या कोई सादा खाना भी काम चल जाता है। क्रेविंग ज्यादा स्पेसिफिक होती है। अगर तला-भुना, नमकीन या मीठा ही चाहिए और तुरंत वह खाना चाहिए तो क्रेविंग की भूमिका ज्यादा हो सकती है। हालांकि भूख और पसंद का एक साथ होना भी संभव है, इसलिए यह पूरी तरह सटीक परीक्षण नहीं है।

3. ध्यान भटकने पर क्रेविंग गायब हो जाती है

खाने से पहले कुछ मिनट ध्यान किसी और काम में लगाएं। डॉ. खमेसरा के अनुसार, कुछ मौसम-संबंधी क्रेविंग 15 मिनट के बाद कम हो सकती हैं। अगर व्यस्त होने पर पकोड़ों की अचानक इच्छा शांत पड़ जाए तो यह संकेत हो सकता है कि आप पल की प्रतिक्रिया दे रहे थे, न कि शारीरिक भूख। लेकिन ध्यान भटकने से असली भूख भी अस्थायी रूप से पीछे हट सकती है।

4. बादल छाए रहने पर कॉम्फर्ट फूड ज्यादा आकर्षक लगता है

बारिश के दिनों की क्रेविंग का मनोवैज्ञानिक पहलू भी है। धुंधला मौसम और कम रोशनी मूड, सतर्कता और आराम की इच्छा को प्रभावित कर सकती है। कुछ लोगों के लिए रिवॉर्डिंग फूड खासतौर पर आकर्षक हो जाते हैं। डॉ. खमेसरा कहती हैं कि यह अनुशासन की कमी नहीं है। दिमाग बस त्वरित आराम की तलाश में होता है।

कुछ लोगों के लिए गर्म पेय पीना, कमरे में रोशनी बढ़ाना या छोटी सैर करने से क्रेविंग कम हो सकती है। अगर गर्म पेय लें तो सादा रखें ताकि अतिरिक्त चीनी न जुड़े।

पसंदीदा मानसून स्नैक्स छोड़ने की जरूरत नहीं

मौसम से प्रेरित क्रेविंग को पहचानने का मतलब यह नहीं कि पकोड़ों पर पाबंदी लगा दें। डॉ. खमेसरा के अनुसार, उद्देश्य हर क्रेविंग से लड़ना नहीं बल्कि यह समझना है कि उसे क्या चला रहा है। कभी आप वास्तव में भूखे होते हैं और खाना जरूरी होता है। कभी बारिश, धुंधली दोपहर या आराम की इच्छा किसी खास स्नैक को अचानक अनिर्वार्य बना देती है।

फर्क समझने से आप बिना लड़ाई के अधिक सचेत विकल्प चुन सकते हैं। और हां, कभी-कभी वह सचेत विकल्प पकोड़ों की प्लेट भी हो सकता है।

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।