विपक्षी गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक निकाले जाने वाले विरोध मार्च से ठीक पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्ष के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करने का अनुरोध ठुकरा दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश भर की ओर से एक ज्ञापन सौंपने के लिए सोमवार शाम 4 से 5 बजे के बीच मुख्य न्यायाधीश से मिलने का समय मांगा था। हालांकि, सीजेआई ने दोनों नेताओं को औपचारिक जवाब भेजते हुए स्पष्ट किया कि वे इस बैठक के लिए ‘इच्छुक नहीं’ हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने फैसले के पीछे तर्क दिया कि जिन मुद्दों पर विपक्ष बात करना चाहता है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर ऐसी बैठक करना अनुचित होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत प्रशासनिक माध्यम से सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकती और नेताओं को अपने मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए नियमित न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए।
विपक्ष का यह पूरा आंदोलन चुनाव आयोग में कथित ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने के गंभीर आरोपों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने और मतपत्रों (Paper Ballots) की वापसी की मांग पर अड़े हुए हैं।
इस विवाद में तब और तेजी आई जब यह खबर सामने आई कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के निर्णयों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना स्वाभाविक प्रक्रिया है और उसके सभी फैसले वैधानिक नियमों के तहत ही लिए गए हैं।
इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में ‘चलो दिल्ली – मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विपक्षी नेता, युवा और नागरिक समाज के प्रतिनिधि कनॉट प्लेस से सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च कर रहे हैं। इससे पहले शुक्रवार को भी विपक्षी सांसदों को विजय चौक पर रोका गया था, जिसके बाद 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की थी।
राष्ट्रपति ने इन चिंताओं की जांच के लिए विपक्ष से कथित अनियमितताओं के ठोस सबूत पेश करने को कहा था। विपक्षी नेताओं का कहना है कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।
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