✍️ नागेंद्र माली आवाज न्यूज
*लखनऊ।* उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को एक बार फिर छह माह के लिए बढ़ाए जाने के आसार बन रहे हैं। इसके पीछे प्रमुख वजह पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को माना जा रहा है। आयोग के नवंबर-दिसंबर में अपनी रिपोर्ट सौंपने की संभावना है। ऐसे में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे खिसक सकती है।
दरअसल, प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल 2026 में प्रस्तावित थे, लेकिन समय पर चुनाव नहीं हो सके। इसके बाद राज्य सरकार ने 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ाया था। यह अवधि नवंबर में पूरी होने जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। वहीं, इसी दौरान प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू होनी हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव को आगे टालने की स्थिति बन सकती है और ग्राम प्रधानों को एक बार फिर छह माह का कार्यकाल दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इससे पहले सरकार ने प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था की थी। हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए जाने को असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद सरकार के सामने पंचायतों के संचालन और चुनाव तक की व्यवस्था को लेकर चुनौती बनी हुई है।
अब सबकी निगाहें पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। यदि पंचायत चुनाव आगे खिसकते हैं तो मौजूदा प्रधानों को छह माह का अतिरिक्त कार्यकाल मिलने की संभावना मजबूत हो सकती है।









