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सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों को आदेश सुरक्षित रखने के 3 महीने के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी उच्च न्यायालयों को आदेश सुरक्षित रखने के तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया। यह देखते हुए कि देरी से याचिकाकर्ताओं को अपूरणीय क्षति होती है, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के उच्च न्यायालयों से आदेश सुरक्षित रखने की तारीख से तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने को कहा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि जमानत आवेदनों पर आदेश उसी दिन सुनाया जाना चाहिए, और यदि उन्हें सुरक्षित रखा जाता है, तो उन्हें अगले दिन सुनाया और अपलोड किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत या सजा निलंबन का आदेश सुनाए जाने के तुरंत बाद जेल अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए और विचाराधीन कैदी/दोषी को अधिमानतः उसी दिन या अधिकतम अगले दिन रिहा कर दिया जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए ये निर्देश जारी किए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को तीन महीने के भीतर लंबित मामलों पर निर्णय सुनाने का निर्देश दिया।

यह भी पढ़ें: जमानत में देरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया, उच्च न्यायालयों को स्पष्ट समयसीमा तय करने का आदेश दिया

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।