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Jaunpur News खेतासराय में गाजी मियां का मेला रद्द, प्रशासन और पुलिस सतर्क – बिना अनुमति आयोजन पर सख्त कार्रवाई

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जौनपुर।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर लगने वाले मेलों पर प्रतिबंध के बाद, 8 मई को खेतासराय में प्रस्तावित गाजी मियां का मेला रद्द कर दिया गया है। जिला प्रशासन और पुलिस ने पूरे क्षेत्र में कड़ी चौकसी शुरू कर दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है।

पुलिस की सतर्कता से मुजावर और डफाली हुए गायब

इस मेले में हर वर्ष शामिल होने वाले तथाकथित मुजावर और डफाली इस बार पुलिस की सख्ती के चलते भूमिगत हो गए हैं। इन पर अंधविश्वास फैलाकर लोगों से धन, अनाज, मवेशी और चढ़ावे के रूप में वसूली करने के आरोप लगते रहे हैं। इस बार किसी तरह का प्रचार-प्रसार भी नहीं हुआ है।

प्रशासन अलर्ट मोड में, बिना अनुमति आयोजन पर रोक

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में गाजी मियां के मेलों पर प्रतिबंध लगाया गया है। जौनपुर के जिलाधिकारी दिनेश चंद्र ने स्पष्ट रूप से कहा है कि खेतासराय में कोई भी धार्मिक मेला आयोजित नहीं होगा।

थानाध्यक्ष की चेतावनी: उल्लंघन पर होगी गिरफ्तारी

थानाध्यक्ष रामाश्रय राय ने कहा, “बिना अनुमति कोई भी आयोजन हुआ तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जेल भेजा जाएगा।“

गाजी मियां के मेले की परंपरा और विवाद

पूर्वांचल के कई जिलों से लोग इस मेले में कनूरी और मन्नतें मांगने आते थे। लकड़ी के निशानों पर मन्नतें बांधी जाती थीं और चने, चावल, बाटी व मुर्गे की बलि चढ़ाई जाती थी। इन चढ़ावों से मुजावर और डफाली बड़ी कमाई करते थे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सैयद सालार मसूद गाजी कौन था?

सैयद सालार मसूद गाजी, महमूद गजनवी का भांजा था और उसने भारत पर आक्रमणों में अहम भूमिका निभाई थी। इतिहासकारों के अनुसार, वह मंदिरों की लूट और विध्वंस में शामिल था।

गाजी मियां का अंत कैसे हुआ?

1034 ईस्वी में राजा सुहेलदेव राजभर की सेना ने बहराइच में गाजी मियां को युद्ध में पराजित कर मार गिराया था। उसके बाद उसे वहीं दफनाया गया, जहाँ अब एक मजार स्थित है।

प्रदेश सरकार की सख्ती और प्रशासन की तत्परता के चलते इस बार खेतासराय में गाजी मियां का मेला नहीं लगेगा। कोई भी धार्मिक, सांस्कृतिक या वाणिज्यिक गतिविधि बिना अनुमति के आयोजित नहीं की जाएगी। पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई है .

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।