उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का पुरजोर बचाव करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। देहरादून में मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर से जुड़े सभी अंतिम फैसले पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन ये सवाल और आरोप केवल निराधार बयानों पर नहीं, बल्कि साक्ष्यों, संस्थागत रिकॉर्ड और ठोस तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने हालिया मीडिया रिपोर्टों का संदर्भ देते हुए कहा कि आयोग की आंतरिक बैठकों में दर्ज प्रशासनिक आपत्तियों या टिप्पणियों को सीधे तौर पर अंतिम निर्णय में मतभेद के रूप में पेश करना कतई उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर का वास्तविक उद्देश्य किसी भी योग्य नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूचियों को पूरी तरह पारदर्शी, त्रुटिरहित और अद्यतन बनाना है। उन्होंने कांग्रेस पर आदतन झूठे विमर्श और भ्रम का माहौल पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष केवल जनता को गुमराह करने के लिए ऐसे मनगढ़ंत नैरेटिव तैयार करता है, जिनकी सच्चाई बहुत जल्द सामने आ जाती है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 11 अगस्त को आयोजित कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान से जुड़े विवाद पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कांग्रेस के इन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया कि यह अनुष्ठान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे या दलित समुदाय को निशाना बनाकर किया गया था। धामी ने दो टूक कहा कि यह हवन न तो किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध था और न ही किसी जाति के।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी के पास इस बात का कोई वीडियो, प्रेस विज्ञप्ति या लिखित साक्ष्य हो कि यह अनुष्ठान किसी जाति के खिलाफ था, तो वह सामने लाए, सरकार उस पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। उन्होंने रेखांकित किया कि देवभूमि उत्तराखंड में सभी जातियों और वर्गों के लोग मिलकर सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने एसआईआर प्रक्रिया और हल्द्वानी मामले को लेकर राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सचिवालय स्थित चुनाव कार्यालय तक विरोध मार्च निकालते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों को पद से हटाने की मांग की गई।
कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती जा रही हैं और फॉर्म-7 के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने मांग की है कि जब तक भौतिक सत्यापन और मतदाताओं को अपनी बात रखने का अवसर न दिया जाए, तब तक किसी का भी नाम मतदाता सूची से न हटाया जाए।
हल्द्वानी का यह विवाद अब राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर गर्मा गया है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर 29 सितंबर को नई दिल्ली में एक विशाल ‘दलित-आदिवासी स्वाभिमान बैठक’ आयोजित करने का एलान किया है। कांग्रेस सांसद मल्लू रवि के अनुसार, यह बैठक कांग्रेस एससी/एसटी एमपी फोरम और एआईसीसी के संबंधित विभागों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है।
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर इस अनुष्ठान को खुला समर्थन देने का आरोप लगाते हुए इसे मल्लिकार्जुन खड़गे और पूरे दलित-आदिवासी समाज का अपमान बताया है। इस सम्मेलन में कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को जुटाकर दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों व सुरक्षा पर राष्ट्रव्यापी रणनीति तैयार करने की योजना है।
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