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जिंदगी में अटके महसूस कर रहे हैं? इंटरनेट कहता है बुक करें ‘रिवर्स वेकेशन’

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आप छुट्टी क्यों प्लान करते हैं? आराम करने, खुद को कुछ लग्जरी देने या रोजमर्रा की भागदौड़ से बचने के लिए। लेकिन यह नया ट्रैवल ट्रेंड इनमें से कुछ भी नहीं करने को कहता है। क्या आपको जिंदगी में उद्देश्यहीनता महसूस हो रही है? रूटीन में इतने सहज हो गए हैं कि आगे बढ़ना मुश्किल लग रहा है?

इंटरनेट ने एक अजीबोगरीब आइडिया निकाला है जिससे आप अपनी रफ्तार वापस पा सकते हैं। कैसे? यात्रा करके।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस मजाकिया ट्रैवल फिलॉसफी के अनुसार, आपकी अगली छुट्टी रोजमर्रा की जिंदगी से ज्यादा लग्जरी नहीं होनी चाहिए, बल्कि “बदतर” होनी चाहिए। इसे ऑनलाइन ‘रिवर्स वेकेशन’ कहा जा रहा है। यह आइडिया पहले एक वायरल ट्वीट से शुरू हुआ और फिर इंस्टाग्राम तक पहुंचा। बीच रिसॉर्ट, इनफिनिटी पूल और ब्रेकफास्ट बुफे पर पैसा खर्च करने की बजाय, ऐसा गंतव्य चुनें जो घर से थोड़ा कम आरामदायक हो। तर्क यह है कि आराम क्षेत्र से बाहर निकलकर और सुविधाओं से दूर जाकर, भले ही थोड़े समय के लिए, आप नई दृष्टि, रोजमर्रा की सुविधाओं के प्रति ज्यादा आभार और शायद अपने लक्ष्यों को हासिल करने की नई ऊर्जा लेकर लौटते हैं।

कुछ इसे व्यंग्यात्मक कहते हैं, कुछ बस अजीब। लेकिन इंटरनेट हास्य के पीछे एक दिलचस्प सवाल है: क्या जानबूझकर असुविधा चुनना हमें आराम क्षेत्र से बाहर निकलने में मदद कर सकता है? बेंगलुरु के स्पार्श हॉस्पिटल की मनोचिकित्सक डॉ. आशा इस विचार से कुछ हद तक सहमत हैं।

वे कहती हैं, “हां, अपनी पसंद के प्रति जागरूक रहकर व्यक्ति कुछ समय के लिए सादा जीवन जीना शुरू कर सकता है, रोजमर्रा की सुविधाओं के प्रति बेहतर आभार विकसित कर सकता है और मानसिक मजबूती बढ़ा सकता है। लगातार सुविधा की सोच से दूर हटना लोगों को बदलने, समस्याएं हल करने और आधुनिक चीजों पर कितनी निर्भरता है, यह समझने के लिए मजबूर करता है।” उनके अनुसार, ऐसा अनुभव आभार सिखा सकता है और अधिकार की भावना कम कर सकता है। लेकिन इसे काम करने के लिए व्यक्ति की मानसिकता उद्देश्य के अनुरूप होनी चाहिए। “जब व्यक्ति इसे आत्म-चिंतन का मौका माने, न कि सजा या प्रतियोगिता, तभी वास्तव में विकास होता है।”

याद है जापान और थाईलैंड में ‘ताबूत में लेटने’ का ट्रेंड? वह लोगों को मृत्यु का सामना करने और जिंदगी की ज्यादा कद्र करने में मदद के लिए था। अगर जिंदगी की कद्र के लिए स्वेच्छा से ताबूत में लेटना ट्रेंड बन सकता है, तो जानबूझकर असुविधा वाली छुट्टी भी इतनी आश्चर्यजनक नहीं लगती। यह जरूरी नहीं कि कोई जगह वस्तुनिष्ठ रूप से “बदतर” हो या सुविधाओं की कमी के लिए मजाक उड़ाया जाए। बल्कि ऐसे अनुभव चुनना है जो थोड़े कम आरामदायक हों और रोजमर्रा की छोटी-छोटी सुविधाओं की ज्यादा कद्र करने में मदद करें।

रिवर्स वेकेशन क्या होता है?

एक दूरदराज का गांव। पहाड़ियों में बेसिक होमस्टे। छोटा ऑफ-ग्रिड केबिन। सोशल मीडिया के अनुसार, यह इतना सरल है— “अगर आप टियर-2 शहर में रहते हैं तो टियर-3 शहर जाएं।”

मूल रूप से ऐसा गंतव्य चुनें जहां सिर्फ बुनियादी जरूरतें हों, लग्जरी नहीं। न ब्लिंकिट, न स्विगी, न लॉन्ड्री, न अच्छी तरह बने बाथरूम की सुविधा। जब सब आराम को अधिकतम करने की कोशिश में हैं, यह ठीक इसका उल्टा है। बिल्कुल विपश्यना या साइलेंट रिट्रीट की तरह।

हालांकि डॉ. आशा ने चेतावनी भी दी। “अगर ट्रेंड को रोमांटिक बनाकर बिना सोचे-समझे अपनाया जाए तो नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। लोग अवास्तविक अपेक्षाओं के आधार पर अनावश्यक दबाव और असुविधा महसूस कर सकते हैं। साथ ही, सीमित संसाधनों वाले लोगों की वास्तविकता को नजरअंदाज कर असली कठिनाई को लाइफस्टाइल प्रयोग बनाने का जोखिम भी है। इसलिए किसी भी प्रयास की सफलता के लिए संतुलन और जागरूकता जरूरी है।”

सोचें तो यात्रा लंबे समय से बदलाव से जुड़ी रही है। खुद को खोजने से लेकर दुख से समझौता करने और याददाश्त सुधारने तक, यात्रा जीवन के अनुभव देती है जो अक्सर सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

क्या यह आपकी जिंदगी पूरी तरह बदल देगा? शायद नहीं। क्या यह आपको आराम क्षेत्र से बाहर धकेलेगा? शायद हां।

तो, क्या आप रिवर्स वेकेशन प्लान करना चाहेंगे?

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।