कलियुग में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा की लालसा से अशांत हो रहा मनुष्य, श्रीमद्भागवत कथा में सुनाए महाभारत के प्रसंग
जौनपुर। जीवन में सुख-दुख और विपरीत परिस्थितियों के बीच भी संतोष बनाए रखना ही सच्ची साधना है। जो व्यक्ति हर परिस्थिति में दया और संतोष का भाव रखता है, उस पर भगवान नारायण की कृपा बनी रहती है। यह बात कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने नगर के विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कही।
कथा के दौरान उन्होंने महाभारत युद्ध के बाद की घटनाओं और अश्वत्थामा के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग मान-सम्मान और प्रतिष्ठा पाने की दौड़ में मानसिक शांति खो रहे हैं। परमात्मा की कथा का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब व्यक्ति सत्संग से जुड़कर अपने विचारों और आचरण को बेहतर बनाने का प्रयास करता है।
### अश्वत्थामा के प्रसंग से समझाया धर्म और क्षमा का महत्व
पं. रजनीकांत द्विवेदी ने महाभारत युद्ध के बाद कौरव पक्ष की स्थिति का उल्लेख करते हुए अश्वत्थामा और दुर्योधन से जुड़ा प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि दुर्योधन की स्थिति देखकर अश्वत्थामा ने पांडवों से बदला लेने का संकल्प किया। इसके बाद उसने पांडवों के पांच पुत्रों की हत्या कर दी और उनके सिर दुर्योधन के सामने रख दिए। इस घटना से दुर्योधन भी विचलित हो गया। अंततः उसने प्राण त्याग दिए।
कथाव्यास ने आगे बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से अश्वत्थामा को दिए जाने वाले दंड के बारे में पूछा, तो उन्होंने उसे जीवित छोड़ने की बात कही। इसके बाद श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा के माथे से मणि निकाल ली। युधिष्ठिर ने भी उसे गुरु-पुत्र बताते हुए उसका वध करने से इनकार कर दिया।
इस प्रसंग के माध्यम से कथाव्यास ने क्षमा, विवेक और धर्म के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि क्रोध और प्रतिशोध का मार्ग विनाश की ओर ले जाता है, जबकि संयम और सद्विचार मनुष्य को सही निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।
### आरती के साथ कथा का शुभारंभ
श्रीमद्भागवत कथा की मुख्य यजमान विमला सेठ हैं। कथा प्रारंभ होने से पहले विवेक सेठ और विनीत सेठ ने व्यासपीठ की आरती उतारी और कथाव्यास से आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश टंडन, सोमेश्वर केसरवानी, अमित त्रिपाठी, रामदयाल द्विवेदी, लोलारक दुबे, नन्हे लाल वर्मा, विभाग प्रचारक आदित्य, रजनीश, महेंद्र, सत्येंद्र, सुरेश तिवारी, विवेक पाठक, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ, शीतला धाम के महंत विनय त्रिपाठी सहित गठना कोठी परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।








