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उत्तराखंड में कुदरत का कहर: पिथौरागढ़-बागेश्वर में भारी तबाही, 32 सड़कें बंद और प्रदेश भर में 12 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट

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उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश भर में आगामी 12 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सोमवार को नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी गढ़वाल और चमोली जिलों में भारी बारिश की चेतावनी के साथ येलो अलर्ट घोषित किया गया है।

मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार और बुधवार को भी पर्वतीय जिलों में बारिश के तेज दौर जारी रहेंगे, जबकि गुरुवार दस सितंबर को देहरादून, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। इसके बाद शुक्रवार और शनिवार को भी प्रदेश के सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।

सीमांत जिले पिथौरागढ़ में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश और जगह-जगह हो रहे भूस्खलन से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। बारिश और मलबे के कारण चीन सीमा को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों सहित कुल 24 मोटर मार्ग पूरी तरह से बंद हो गए हैं। कैलाश मानसरोवर, आदि कैलाश और व्यास घाटी को जोड़ने वाली तवाघाट-गुंजी सड़क भूस्खलन के कारण शनिवार से ही ठप पड़ी है।

एस बैंड के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से बह गया है, जिससे धारचूला और गुंजी के बीच सैकड़ों यात्री और वाहन फंसे हुए हैं। दारमा घाटी को जोड़ने वाली तवाघाट-सोबला सड़क और चौदास घाटी का कंज्योति तवाघाट-नारायण आश्रम मोटर मार्ग भी भूस्खलन की वजह से बंद हैं, जिससे सीमांत क्षेत्रों में राशन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का भारी संकट पैदा हो गया है।

जिले के ग्रामीण इलाकों का संपर्क मुख्य कस्बों से पूरी तरह टूट गया है। घाट-पनार-गंगोलीहाट, जौलजीबी-झूलाघाट, सेराघाट-दानीबगड़-बोना, होकरा-नामिक, और मदकोट-दारमा मोटर मार्ग सहित दो दर्जन सड़कें मलबे की चपेट में हैं। बारमौ, उमचिया, नामिक और जुम्मा जैसे कई गांवों के हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पैदल सफर करने को मजबूर हैं।

ग्रामीण पीठ पर राशन ढोकर मीलों का खतरनाक सफर तय कर रहे हैं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और लोक निर्माण विभाग की टीमें भारी मशीनों के साथ मलबा हटाने और यातायात बहाल करने के काम में युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

पहाड़ों पर हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। मुनस्यारी क्षेत्र में बहने वाली गोरी नदी के उफान से मदकोट इलाके में भारी भूकटाव शुरू हो गया है। नदी का तेज बहाव आवासीय घरों और स्थानीय शिशु मंदिर स्कूल के लिए बड़ा खतरा बन गया है। साल 2013 और 2018 की विनाशकारी बाढ़ की यादों से सहमे ग्रामीण नदी किनारे सुरक्षा दीवार बनाने और त्वरित राहत कार्यों की मांग कर रहे हैं। नदी के कटान की वजह से कई परिवारों के घरों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

पिथौरागढ़ के साथ-साथ बागेश्वर जिले में भी कुदरत का प्रकोप जारी है। जिले में लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते आठ प्रमुख ग्रामीण मोटर मार्ग मलबे के कारण बंद पड़े हैं। सरयू और गोमती नदियों का जलस्तर भी लगातार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। संबंधित विभाग बंद सड़कों को खोलने के लिए मलबा हटाने के काम में लगे हैं।

हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम जनता और पर्यटकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान किसी भी तरह की अनावश्यक यात्रा से बचें और सफर पर निकलने से पहले रास्तों की स्थिति की सटीक जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।