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जौनपुर में स्क्रब टाइफस की दस्तक से बढ़ी चिंता, एक महीने में मिले 4 नए मरीज

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✍️ नागेंद्र माली पत्रकार आवाज न्यूज़
जौनपुर। जिले में डेंगू और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के खतरे के बीच स्क्रब टाइफस के चार नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। पिछले एक महीने में चार मरीजों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अब तक जिले में इस बीमारी के कुल छह मामले सामने आ चुके हैं।
🔴बारिश के बाद मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने के बीच स्क्रब टाइफस के मामले सामने आने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। निजी अस्पतालों में भी बुखार और मच्छरजनित बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है। वहीं, नगर निकायों में साफ-सफाई, फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।चिकित्सक डॉ. एके सिंह के अनुसार, स्क्रब टाइफस ‘ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी’ नामक जीवाणु से होने वाला संक्रमण है। यह बीमारी घास-फूस, झाड़ियों और पेड़-पौधों के बीच पाए जाने वाले संक्रमित माइट के लार्वा के काटने से फैलती है। इसके काटने के करीब नौ दिनों के भीतर बुखार समेत बीमारी के लक्षण विकसित हो सकते हैं।
🔴विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी से बचाव के लिए घर और आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है। बारिश के मौसम में घास, झाड़ियों और अनावश्यक वनस्पतियों को बढ़ने से रोकना चाहिए। ऐसे स्थानों पर जाने से बचना चाहिए जहां संक्रमित माइट के पाए जाने की आशंका हो। घर से बाहर निकलते समय शरीर को यथासंभव ढककर रखने की सलाह दी जाती है।माइट के काटने की आशंका होने पर प्रभावित त्वचा को साबुन और पानी से साफ करना चाहिए। कपड़े, कंबल और तौलिये को गर्म पानी में धोना भी स्वच्छता बनाए रखने में मददगार हो सकता है।
🔴एपिडेमियोलॉजिस्ट जियाउल हक ने चार मरीजों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि होने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि बीमारी को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है और बचाव के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। उन्होंने लोगों से बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक की सलाह लेने की अपील की है।
🔴स्वास्थ्य विभाग की ओर से साफ-सफाई, फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव को लेकर संबंधित निकायों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अब देखना होगा कि जिले में बढ़ते संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए इन व्यवस्थाओं को जमीन पर कितना प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।

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