हाल ही में नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले और इसके बाद हुए राष्ट्रव्यापी छात्र विरोध-प्रदर्शनों ने देश की परीक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर कर दिया। इसी के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ लोकसभा में पेश किया है। यह नया बिल 2024 में बने मूल कानून को और अधिक सख्त बनाता है। आइए समझते हैं कि महज दो साल में इस कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी और नए बिल में क्या कड़े प्रावधान किए गए हैं।
2024 के कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
पुराना कानून परीक्षा माफियाओं और सॉल्वर गैंग में खौफ पैदा करने में नाकाफी साबित हुआ, क्योंकि उसमें सजा और जुर्माने के प्रावधान काफी हल्के थे। इसके अलावा, मामलों की जांच और अदालती कार्यवाही सालों तक खिंचती थी, जिससे अपराधी आसानी से जमानत पाकर बच निकलते थे। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों (जैसे NTA) पर भी जवाबदेही तय करने वाले सख्त नियमों की कमी थी। ऐसे में हालिया नीट-यूजी विवाद ने सरकार पर एक ऐसा अचूक कानूनी ढांचा तैयार करने का दबाव बनाया, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
नए विधेयक (2026) के तहत किए गए प्रमुख और सख्त बदलाव:
सजा और जुर्माने में भारी वृद्धि: अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों के लिए सजा को बढ़ाकर अब न्यूनतम 5 साल और अधिकतम 10 साल कर दिया गया है। साथ ही जुर्माना 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं, गड़बड़ी में शामिल परीक्षा एजेंसियों या सर्विस प्रोवाइडर को कम से कम 5 साल की जेल और सीधे 5 करोड़ रुपये का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा, पेपर लीक करने वाले संगठित गिरोहों (परीक्षा माफिया) को 5 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ से लेकर 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और समयबद्ध जांच: नए कानून के तहत पेपर लीक मामलों की जांच अब एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा की जाएगी। जांच एजेंसियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे किसी भी हाल में 60 दिनों (2 महीने) के भीतर अपनी जांच पूरी करें।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन: अदालती मामलों को सालों तक लटकने से रोकने के लिए हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। चार्जशीट दाखिल होने के बाद इन अदालतों को रोजाना (दैनिक आधार पर) सुनवाई करनी होगी और 3 महीने के भीतर अपना फैसला सुनाना होगा।
अपील के सख्त नियम: अगर कोई दोषी फास्ट-ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख करना चाहता है, तो उसे फैसला आने के 90 दिनों के भीतर ही अपील करनी होगी। इसके बाद कोई भी अपील स्वीकार नहीं की जाएगी। हाई कोर्ट को भी ऐसी अपीलों का निपटारा 3 महीने के भीतर ही करना होगा।
किन परीक्षाओं पर लागू होगा यह कानून?
यह नया और सख्त कानून केंद्र सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली सभी प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा। इनमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षाएं (जैसे NEET, JEE), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग (IBPS) और केंद्रीय मंत्रालयों की अन्य सभी सरकारी भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं।
The post नया एंटी-पेपर लीक बिल 2026: 10 साल की जेल और 10 करोड़ का जुर्माना, जानें नए कानून के सख्त प्रावधान appeared first on Live Today | लाइव टुडे.
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