पूजा यादव (वरिष्ठ पत्रकार) आवाज न्यूज़। राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता अहा ! ग्राम जीवन भी क्या है क्यों न इसे सबका मन चाहे आज भी पाठकों को ग्रामीण जीवन के प्रति संवेदनाओं को बढ़ा देती हैं । आधुनिक परिवेश में धीरे-धीरे ग्रामीण जनता का पलायन शहरों की ओर तेजी से हो रहा है और गांव अपने को पुराने खंडहरों के रूप में संजोये हुए बैठा पड़ा है। गांव के लोग सीधे-सादे भोले -भाले संस्कारों से युक्त छोटे बड़ों के अदब लिहाज करने वाले हैं होते हैं। आज भी गांव में किसी को कोई बीमारी या विपत्ति पड़ जाती है तो अगल-बगल के सारे ग्रामीण वासी दरवाजे पर मदद के लिए आ जाते हैं और हर संभव व्यक्ति को मदद करते हैं जब कि शहरों में आज पड़ोस के लोग एक दूसरे को देखने से भी परहेज करते हैं। गांव की हवा पानी मिट्टी इतनी शुद्ध है कि उसके संपर्क में रहने से व्यक्ति कम से कम बीमार पड़ता है और छोटी-मोटी बीमारी पर जल्दी ठीक हो जाता है किंतु शहरों की हवा पानी मिट्टी प्रदूषित हो चुकी है जो कि कहीं से भी स्वास्थ्य हितकर नहीं है। जहां तक लेखक को याद है कि पुराने समय में गांव के लोगों की शिक्षा दीक्षा पुराने प्राथमिक विद्यालय के बरामदे या उसके पेड़ के नीचे टाट पट्टियों पर बैठक कर होती थी गुरु जी इमला सुलेख जोड़ घटाना गुणा भाग भिन्न बटा का सवाल सीखाते थे और बच्चे उसे बड़े मन से सीखते थे 20 तक का पहाड़ा कक्षा 5 तक याद रखना सभी को अनिवार्य होता था और कक्षा तीन तक के बच्चों को 10 तक का पहाड़ा याद रखना होता था अगर गिनती पहाड़ा इकाई दहाई ठीक से नहीं आ रहा है तो छात्रों की पिटाई मोटे-मोटे डंडों से हुआ करती थी लेकिन मजाल क्या की कोई छात्र इसकी शिकायत अपने माता-पिता से करें यही एक अजब लिहाज़ और संस्कार था की गांव के प्राथमिक पाठशाला में पढ़े बच्चे आईएएस पीसीएस डॉक्टर इंजीनियर जैसे प्रतिष्ठा परक पदों पर आसीन होते थे। गांव की हरियाली पेड़ों का स्थान सुबह-सुबह गांव की कच्ची सड़कों का सैर करना खेत खलिहान को देखना बूढ़े बच्चन सभी का कर्तव्य हुआ करता था और सुबह-सुबह का उगते हुए सूरज और खेतों के बीच लहराती फसलों को देखना मानो किसी स्वर्ग से कम नहीं था ऐसा लगता था की धरती का स्वर्ग यही उत्तर आया है
मगर अब वह दिन धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं लोग आधुनिक सुख सुविधाओं के चक्कर में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं कुछ लोग रोटी रोजी के अभाव में भी शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं और फिर वह वही अपने परिवार बच्चों के साथ रहना प्रारंभ कर देते हैं। आज का गांव धीरे-धीरे आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है अब गांव में कच्चे मकान बिरले किसी के यहां देखने को मिलते हैं लगभग गांव के सभी मकान पक्के घरों में तब्दील हो चुके हैं और गांव के सड़के पिच रोड के रूप में परिवर्तित हो चुकी है गांव में कुछ प्राइवेट विद्यालय भी खुल चुके हैं और सरकार भी पुराने ग्रामीण स्कूलों को आधुनिकता से जोड़ने के लिए पूरी तरह से उनकी कायाकल्प कर रही है प्रत्येक स्कूल में स्मार्ट टीवी फर्स टाइल्स युक्त पेय जल व्यवस्था,बिजली,हवा के लिए पंखे, बैठने के लिए डेस्क बेंच की व्यवस्था कर रही है।
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