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✍️✍️रिश्तों की हकीकत✍️✍️
आजकल रिश्ते कांच की तरह तोड़ देते हैं लोग।
जब जरूरत हो थामने कि हाथ छोड़ देते हैं लोग।।अब हर महफिल में खामोश रहना ही ठीक है।
वरना बातों को बहुत ही तोड़ मरोड़ देते हैं लोग।।आप तो कहोगे सिर्फ दो ही बातें महफिल में ।
और चार बातें तो खुद से ही जोड़ देते हैं लोग ।।सच अकेला है कोई साथ नहीं इसके आजकल।
और इस झूठ का साथ तो करोड़ देते हैं लोग ।।और किसी को कराना भी नहीं है सच से रूबरू ।
वरना खामखां ही अब मुंह सिकोड़ देते हैं लोग।।थोड़ी सी ही सही मगर आप कड़वाहट भी रखिए।
मीठे होने पे तो गन्ने की तरह निचोड़ देते हैं लोग..!!गुरु प्रसाद विश्वकर्मा
पत्रकार / शिक्षाविद







