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पीएम मोदी का तमिल प्रेम कभी भी उनके काम में नहीं दिखा: स्टालिन

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी तमिलनाडु में सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं के नामकरण में संस्कृत के उपयोग पर असंतोष व्यक्त किया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आज (5 मार्च) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कार्रवाई की आलोचना की और उनसे तमिल को आधिकारिक भाषा बनाने, हिंदी को थोपने पर रोक लगाने और सेंगोल जैसे प्रतीकात्मक इशारों के बजाय तमिलनाडु के विकास को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की और तमिल संस्कृति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया, जबकि वह इसका समर्थन करने का दावा करती है। उन्होंने लिखा, “अगर भाजपा का यह दावा सच है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री को तमिल से बहुत प्यार है, तो यह कभी भी कार्रवाई में क्यों नहीं दिखता?”

तमिल को आधिकारिक भाषा बनाएं 

स्टालिन ने सुझाव दिया कि प्रतीकात्मक इशारों के बजाय सरकार को तमिल का समर्थन करने वाले ठोस कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, “संसद में सेंगोल को स्थापित करने के बजाय, तमिलनाडु में केंद्र सरकार के कार्यालयों से हिंदी को हटा दें। खोखली प्रशंसा करने के बजाय, तमिल को हिंदी के बराबर आधिकारिक भाषा बनाएं और संस्कृत जैसी मृत भाषा की तुलना में तमिल के लिए अधिक धन आवंटित करें।”

मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु में संस्कृत और हिंदी को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी निंदा की। उन्होंने कहा, “तिरुवल्लुवर के भगवाकरण के हताशापूर्ण प्रयासों को रोकें और उनके कालजयी क्लासिक, तिरुक्कुरल को भारत की राष्ट्रीय पुस्तक घोषित करें।”

स्टालिन ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय बजट में केवल तिरुक्कुरल का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं होगा, तथा इसके बजाय उन्होंने व्यावहारिक उपाय करने का आह्वान किया: “तमिलनाडु के लिए विशेष योजनाएं, त्वरित आपदा राहत कोष तथा नई रेलवे परियोजनाएं सुनिश्चित करके उनका सम्मान किया जाना चाहिए।”

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।