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उत्तर प्रदेश विधानसभा के पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र में संभल का मुद्दा उठाएगी समाजवादी पार्टी

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नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि वह बदायूं और संभल जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा से बचने के बजाय उनका समाधान करे।

उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले, नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) माता प्रसाद पांडे ने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी (एसपी) राज्य में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव, खासकर संभल की स्थिति पर चिंता जताएगी। एलओपी पांडे ने कहा कि पार्टी सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के प्रयासों के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराएगी और सत्र में काफी हंगामा होने की आशंका है।

मीडिया को संबोधित करते हुए पांडेय ने कहा, “कल (16 दिसंबर) हम सरकार को सांप्रदायिक घटनाओं और दंगों के माध्यम से सौहार्द बिगाड़ने के प्रयासों के बारे में नोटिस देंगे। हम इन घटनाओं के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराएंगे। कल सत्र में हमें काफी हंगामा देखने को मिलने की उम्मीद है।” पांडेय ने संभल में मंदिर मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने सवाल किया, “मुख्यमंत्री ने अपनी बात रखी और उन्हें ऐसा करने का अधिकार है। लेकिन मंदिर अब क्यों मिला? क्या इसकी खुदाई की गई थी या यह पहले से ही वहां था और हाल ही में इसकी पहचान हुई?”

सपा अन्याय के खिलाफ लड़ेगी लड़ाई

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी हर प्रकार के अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी सभी समुदायों के बीच सभी प्रकार के अन्याय के खिलाफ लड़ेगी और जनता से जुड़े मुद्दे जैसे बेरोजगारी, किसानों की शिकायतें या अन्य अन्याय को उठाएगी।”

पांडे ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह मुख्य मुद्दों से ध्यान भटका रही है तथा वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटका रही है।

उन्होंने कहा, “आज देश में सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी है। किसान कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और इनसे ध्यान हटाने के लिए सरकार ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। 25 करोड़ लोगों वाले राज्य की चिंताओं का जवाब देने से सरकार क्यों डर रही है?”

पांडे ने यह भी दोहराया कि समाजवादी पार्टी शीघ्र चुनाव के विचार का विरोध करती है, जबकि मायावती इस प्रस्ताव का समर्थन करती हैं।

संभल हिंसा पर सीएम योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को संभल में एक ऐतिहासिक मंदिर के 46 साल से बंद होने और उस अवधि के दौरान कथित हिंसा के पीड़ितों को न्याय नहीं मिलने पर सवाल उठाया और पिछली सरकारों पर आस्था और विरासत की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

संभल का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा, “क्या प्रशासन ने अचानक रातों-रात इतना प्राचीन मंदिर बना दिया? क्या भगवान हनुमान की सदियों पुरानी मूर्ति रातों-रात प्रकट हो गई? क्या प्राचीन ज्योतिर्लिंग कहीं से अचानक प्रकट हो गया? क्या यह आस्था का विषय नहीं था? 46 साल पहले संभल में हुए नरसंहार के दोषियों को सजा क्यों नहीं मिली? उस समय मारे गए निर्दोष लोगों के बारे में कोई चर्चा क्यों नहीं होती? 46 साल पहले संभल में बेरहमी से मारे गए लोगों का क्या दोष था?”

आदित्यनाथ ने अयोध्या के घटनाक्रम के बारे में काल्पनिक सवाल उठाते हुए कहा, “क्या होता अगर राम मंदिर पर अयोध्या का फैसला नहीं सुनाया गया होता? क्या होता अगर राम मंदिर नहीं बनाया गया होता? क्या अयोध्या में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होता? क्या अयोध्या की सड़कों को चार लेन की सड़कों में विकसित किया गया होता? क्या अयोध्या को इतनी उत्कृष्ट कनेक्टिविटी हासिल हुई होती?”

उन्होंने कहा कि अयोध्या के निवासी और यहां आने वाले श्रद्धालु अब इस बदलाव से खुश हैं, जबकि उन्होंने कुछ समूहों पर इन बदलावों का विरोध करने का आरोप लगाया। आदित्यनाथ के अनुसार, ऐसे समूहों ने संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द को शामिल कर दिया है, जिससे इसका सार कमज़ोर हो गया है।

उन्होंने कहा, “वे काशी विश्वनाथ धाम के परिवर्तन, राम मंदिर के निर्माण और अयोध्या की दिव्य भव्यता से परेशान हैं। उनकी शिकायत यह है कि दशकों तक शासन करने के बावजूद उन्होंने कुछ हासिल नहीं किया। आत्मनिरीक्षण करने के बजाय, वे अपनी असफलताओं के लिए हमारी सफलता को दोषी ठहराते हैं।”

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी संभल में 400 साल पुराने भगवान शिव और हनुमान मंदिर की पुनः खोज और पुनः खोले जाने के बाद आई है, जो 1978 से बंद था। अतिक्रमण और बिजली चोरी से संबंधित निरीक्षण के दौरान मंदिर का पता चला था। अधिकारियों ने मंदिर को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की योजना की घोषणा की है।

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।