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बरेली में मत्स्य अधिकारी बनकर अवैध वसूली करने वाले गिरोह का भंडाफोड़: दो आरोपी गिरफ्तार, थाई मांगुर के नाम पर देते थे धमकी

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उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में प्रतिबंधित ‘थाई मांगुर’ मछली पालन का डर दिखाकर मत्स्य पालकों से अवैध वसूली करने वाले एक शातिर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जो खुद को मत्स्य विभाग का अधिकारी बताकर भोले-भाले मछली पालकों को धमकाते और उनसे भारी रकम वसूलते थे।

एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि अब तक इस गिरोह द्वारा दो लाख रुपये से अधिक की अवैध वसूली किए जाने के पुख्ता प्रमाण मिल चुके हैं, जबकि इस खेल में शामिल तीन अन्य फरार आरोपियों की तलाश तेजी से की जा रही है।

वसूली का तरीका और खुलासे

पुलिस के अनुसार, भोजीपुरा थाना क्षेत्र के रहने वाले एक मछली पालक सालिम रजा ने 11 सितंबर को इस संबंध में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने शिकायत की थी कि अगस्त के महीने में इन ठगों ने खुद को मत्स्य विभाग का अधिकारी बताकर उन्हें गंभीर कार्रवाई की धमकी दी और डरा-धमकाकर 70 हजार रुपये ऐंठ लिए। इसी तरह, देवरनियां थाना क्षेत्र में एक अन्य मछली पालक प्यारेलाल से भी 6 सितंबर को 13 हजार रुपये वसूले गए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह केवल नकद ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन माध्यमों से भी पैसे ट्रांसफर करवाता था, जिसके कई स्क्रीनशॉट पुलिस के हाथ लगे हैं।

पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका गिरोह मछली पालकों को प्रतिबंधित थाई मांगुर पालने, फर्जी मुकदमों में फंसाने और जेल भिजवाने का खौफ दिखाकर लगातार ब्लैकमेल कर रहा था। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस ने सहायक निदेशक मत्स्य गायत्री पांडेय से समन्वय स्थापित किया।

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पूरे विभाग में केवल एक ही निरीक्षक और चार-पांच कर्मचारी ही तैनात हैं, जिससे स्पष्ट हो गया कि ये लोग फर्जी अधिकारी बनकर ठगी कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपी आजम के बारे में यह भी पता चला है कि वह पहले किसी पोर्टल पर मीडियाकर्मी के रूप में कार्य कर चुका है और उसके खिलाफ पहले से ही दहेज उत्पीड़न जैसे अन्य मामले दर्ज हैं।

थाई मांगुर और देसी मांगुर का अंतर

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बाजार में ‘देसी मांगुर’ मछली की भारी मांग है और इसकी कीमत करीब एक हजार रुपये प्रति किलो तक होती है, जबकि ‘थाई मांगुर’ की कीमत महज 80 से 150 रुपये के बीच है। स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से थाई मांगुर का पालन और बिक्री भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित है। देसी और थाई मांगुर दिखने में एक जैसे होने के कारण आम लोग अक्सर पहचान में धोखा खा जाते हैं।

इसी समानता का फायदा उठाकर यह शातिर गिरोह मछली पालकों को निशाना बनाता था। फिलहाल, पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों (आजम और साजिद) को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है, और इस गिरोह के बाकी तीन फरार सदस्यों—रिजवान, बसंत शर्मा और अरविंद—की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है।

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।