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अरुणाचल प्रदेश में चीन का कोई अतिक्रमण नहीं: सरकारी सूत्रों ने वायरल दावों का खंडन किया

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अरुणाचल प्रदेश में चीन द्वारा कथित तौर पर “धीरे-धीरे अतिक्रमण” करने के नए दावों को सरकारी सूत्रों ने खारिज कर दिया है। सूत्रों ने सोशल मीडिया पर फैल रहे इन आरोपों को बिना किसी ठोस सबूत के “ध्यान आकर्षित करने की चाल” बताया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का हवाला देते हुए बताया गया है कि अरुणाचल प्रदेश में चीन द्वारा ऐसा कोई “धीरे-धीरे अतिक्रमण” नहीं किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि हालांकि इस क्षेत्र में भारत-चीन सीमा कुछ क्षेत्रों में अभी भी निर्धारित नहीं है, लेकिन गश्ती दल के आमने-सामने आने की घटनाओं को स्थापित तंत्र और प्रोटोकॉल के माध्यम से निपटाया जाता है।

सोशल मीडिया पर चल रहे दावों का जवाब देते हुए सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) सीमा पर पूरी तरह से नियंत्रण बनाए रखने, घटनाक्रम पर नज़र रखने और चीनी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए तैयार हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया , “जैसा आरोप लगाया जा रहा है, अरुणाचल प्रदेश में चीन द्वारा कोई धीमी गति से अतिक्रमण नहीं हो रहा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत-चीन सीमा के कुछ हिस्से अभी तक सीमांकित नहीं हैं, इसलिए दोनों तरफ के गश्त दल कभी-कभी आमने-सामने आ जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, ऐसी स्थितियों से मौजूदा तंत्र और प्रोटोकॉल के माध्यम से निपटा जाता है।

सूत्रों ने अरुणाचल प्रदेश पर चीन के लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय दावों की ओर भी इशारा किया। बीजिंग इस राज्य को “दक्षिण तिब्बत” कहता है और ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र पर भारत की संप्रभुता को चुनौती देता रहा है। 1960 में भारत-चीन सीमा वार्ता के दौरान, चीन ने कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश में लगभग 69,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना दावा किया था।”चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत के रूप में अपना दावा करता है, जिसे उसने 1960 की सीमा वार्ता में स्पष्ट किया था, जिसमें उसने राज्य के लगभग 69,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना दावा जताया था।

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।