कानपुर आवाज न्यूज़। उत्तर प्रदेश में गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज कानपुर के मनोरोग विभाग के शोधकर्ताओं ने 263 किशोरों पर मोबाइल- टीवी के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले हानिकारक प्रभाव पर प्रकाश डाला है। शोधकर्ताओं के अनुसार 263 किशोरों पर किए गए अध्ययन से यह निष्कर्ष निकल कर आया है कि मोबाइल टीवी के अधिक प्रयोग से किशोरों की नीद गायब हो गई है जबकि किशोरों को कम से कम 8 घंटे की नींद लेना स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। मोबाइल टीवी के अधिक प्रयोग से आजकल किशोर और किशोरिया 4 से 5 घंटे के नींद ले पा रहे हैं जिसके कारण उनके ऊपर मानसिक तनाव का प्रभाव बढ़ता जा रहा है जिसके परिणाम स्वरूप इनका पढ़ाई में कम मन लगना, कक्षा में पढ़ाई का प्रदर्शन गिरना, आक्रामक व्यवहार एवं बात-बात पर गुस्सा करना तथा चिड़चिड़ा होने जैसी समस्याएं आ रही है। गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज कानपुर के मनोरोग विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर धनंजय चौधरी के अनुसार अत्यधिक मोबाइल टीवी के स्क्रीन के प्रभाव से नीली रेडिएशन निकलती है जिसके कारण बच्चों के मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। मोबाइल टीवी के स्क्रीन के नीली रेडिएशन के कारण बच्चों के मस्तिष्क में हारमोंस मिलो टैनिन का निकलना काम हो जाता है जो की नींद के लिए जिम्मेदार हारमोंस माना जाता है इस हारमोंस की कमी के कारण बच्चों में नींद नहीं आती है या बहुत कम जाती है। विभागाध्यक्ष महोदय के अनुसार अभिभावकों को यह सलाह दी जाती है की बच्चों को ज्यादा से ज्यादा आउटडोर गेम खेलने में प्रोत्साहित करें और मोबाइल टीवी का उपयोग कम से कम करने की सलाह दें।
मोबाइल – टीवी के अधिक इस्तेमाल से कम हो गई किशोरों की नींद
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