प्रमोद शुक्ला, सीपीडीआरएस, प्रभारी, पूर्वी उत्तर प्रदेश
✍️ नागेंद्र माली (वशिष्ठ पत्रकार)आवाज न्यूज़
जौनपुर।
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। यही वह माध्यम है जो समाज को जागरूक, आत्मनिर्भर और विकसित बनाता है। लेकिन आज देश के लाखों छात्र, अभिभावक और शिक्षक इस बात को महसूस कर रहे हैं कि हमारी शिक्षा व्यवस्था कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का असमान वितरण, संसाधनों की कमी, बढ़ता शैक्षणिक दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद, पारदर्शिता पर उठते सवाल और छात्रों की मानसिक परेशानियाँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।
🔴हर वर्ष लाखों युवा बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर पढ़ाई करते हैं। वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। लेकिन जब उन्हें एक निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था नहीं मिलती, तो उनका विश्वास कमजोर पड़ने लगता है। यह केवल किसी एक छात्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश के भविष्य से जुड़ा विषय है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर देश के जाने-माने शिक्षा सुधार समर्थक और नवाचार के लिए प्रसिद्ध सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग करना है जिसमें हर छात्र को समान अवसर मिले, प्रतिभा का सम्मान हो और युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो।
🔴यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं है। यह उन लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की भावनाओं का प्रतीक है जो चाहते हैं कि देश की शिक्षा व्यवस्था समय के अनुसार मजबूत, आधुनिक और निष्पक्ष बने। शिक्षा में सुधार किसी सरकार या संस्था की अकेली जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
यदि आप भी मानते हैं कि देश के प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा, निष्पक्ष अवसर और सुरक्षित भविष्य मिलना चाहिए, तो लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठाना हर नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है।
🔴20 जुलाई को दिल्ली में प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होकर शिक्षा सुधार की इस मुहिम का समर्थन किया जा सकता है। बदलाव तभी संभव है जब समाज जागरूक होकर संवैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यमों से अपनी बात मजबूती से रखे।






