बढ़ते कच्चे तेल के दाम और वैश्विक तनाव के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि रुपया 100 के स्तर को छूना कोई बड़ी समस्या नहीं है। असली खतरा बढ़ती महंगाई, रोजगार और आर्थिक विकास पर है।
पूर्व IMF डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ और नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि 100 सिर्फ एक संख्या है। इस पर ज्यादा ध्यान देने के बजाय सरकार और RBI को रोजगार, मुद्रास्फीति और उत्पादन पर फोकस करना चाहिए। कमजोर रुपया निर्यात को बढ़ावा दे सकता है और आयात पर खर्च घटा सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने साफ किया कि रुपए का तेजी से गिरना खतरनाक हो सकता है क्योंकि इससे आयातित महंगाई बढ़ेगी। RBI नियंत्रित तरीके से हस्तक्षेप कर रुपए में अस्थिरता रोकने की कोशिश कर रहा है।
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