Home आवाज़ न्यूज़ फर्जी कागजात से नौकरी पाने वाले शिक्षक को 7 साल की सजा

फर्जी कागजात से नौकरी पाने वाले शिक्षक को 7 साल की सजा

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पीलीभीत की एक अदालत ने फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल करने के जुर्म में 36 वर्षीय महिला को सात साल के कारावास की सजा सुनाई है।

29 मार्च को कोर्ट ने गुप्ता की सुनवाई से छूट की अर्जी खारिज कर दी और उन्हें दोषी करार देते हुए उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। बाद में वह कोर्ट में पेश हुईं जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

सरकारी वकील (पीलीभीत) राकेश वर्मा ने बताया कि दोषी क्षमा गुप्ता 2015 से शिक्षा विभाग में कार्यरत थी। जेल की सजा के साथ ही अदालत ने 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

29 मार्च को कोर्ट ने गुप्ता की सुनवाई से छूट की अर्जी खारिज कर दी और उन्हें दोषी करार देते हुए उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। बाद में वह कोर्ट में पेश हुईं जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। वर्मा ने बताया कि उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति हड़पने के लिए प्रेरित करना), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत आदि की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) के तहत दोषी ठहराया गया।

मुकदमे के दौरान कुल आठ अभियोजन पक्ष के गवाहों की परीक्षा ली गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला अगस्त 2017 का है, जब पीलीभीत के एक अंतर-सरकारी कॉलेज (माध्यमिक विद्यालय) के प्रिंसिपल ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी जिसमें कहा गया था कि कन्नौज जिले की निवासी क्षमा गुप्ता ने संस्थान में सहायक शिक्षक का पद हासिल करने के लिए कथित रूप से फर्जी बी.एड मार्कशीट और प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया।

शिकायत के बाद उसके शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच शुरू की गई। बी.एड. की मार्कशीट और सर्टिफिकेट, जिस पर वाराणसी के एक संस्थान का नाम था, को प्रमाणीकरण के लिए वहां भेजा गया। वाराणसी के संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की कि उसने गुप्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज जारी नहीं किए थे। मार्कशीट को 2014 में जारी किया गया दिखाया गया था।

रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग ने गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया और उन्हें सेवा से बर्खास्त भी कर दिया गया। पुलिस ने मामले की जांच की और गुप्ता के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।