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सर्वेक्षण के दौरान संभल में मिली 1857 के विद्रोह के समय की बावड़ी

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के संभल में रानी की बावड़ी नामक 250 फुट गहरी बावड़ी की खोज इस महीने की शुरुआत में उसी क्षेत्र में एक प्राचीन बांके बिहारी मंदिर के खंडहर पाए जाने के बाद हुई है।

संभल में शनिवार को एक सर्वेक्षण के दौरान 1857 के विद्रोह के समय की 250 फुट गहरी एक बावड़ी मिली। लक्ष्मण गंज इलाके में दो बुलडोजरों द्वारा खुदाई के बाद यह बावड़ी मिली।

रिपोर्टों के अनुसार, रानी की बावड़ी नामक इस बावड़ी की खोज , इसी महीने की शुरुआत में उसी क्षेत्र में एक प्राचीन बांके बिहारी मंदिर के अवशेष मिलने के बाद हुई है।

मामला तब प्रकाश में आया जब सनातन सेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख कौशल किशोर ने संभल के जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेंसिया को पत्र लिखकर बताया कि लक्ष्मण गंज में सहसपुर का राजपरिवार रहता था और वहां एक बावड़ी भी थी।

स्थानीय लोगों और ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, यह बावड़ी 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय की है। किशोर ने डीएम से इस स्थल की खुदाई और सौंदर्यीकरण का आग्रह किया।

इसके बाद डीएम ने लक्ष्मण गंज में खुदाई का आदेश दिया। इस काम में दो बुलडोजरों का इस्तेमाल किया गया और उस जगह को खोदा गया, जिसके बाद यह बावड़ी मिली।

एक अधिकारी ने इंडिया टुडे टीवी को बताया, “खुदाई के दौरान एक दो मंजिला इमारत और रानी की बावड़ी दिखी, जिसका उल्लेख ऐतिहासिक अभिलेखों में है। अभी खुदाई चल रही है।” दृश्यता संबंधी समस्याओं के कारण रात में खुदाई रोक दी गई थी।

डीएम ने कहा कि जिन परिवारों ने बावड़ी वाली जगह पर अतिक्रमण कर रखा है, उन्हें नोटिस देकर अतिक्रमण हटाया जाएगा।

शुक्रवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने संभल के कार्तिकेय मंदिर में कार्बन डेटिंग की, जिसे 46 साल तक बंद रहने के बाद 13 दिसंबर को फिर से खोला गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सांप्रदायिक दंगों के बाद 1978 से मंदिर बंद था, जिसके कारण स्थानीय हिंदू समुदाय विस्थापित हो गया था।

अधिकारियों ने कार्बन डेटिंग की और आसपास के पांच तीर्थ स्थलों की जांच की, जिनमें भद्रक आश्रम, स्वर्गदीप और चक्रपाणि शामिल थे, साथ ही 19 कुओं का निरीक्षण भी किया।

अधिकारियों ने पहले कहा था कि मंदिर की खोज अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हुई थी। अधिकारियों ने इस खोज को अनियोजित बताया और दावा किया कि अभियान के दौरान उन्हें यह स्थल “अचानक” मिला।

यह मंदिर शाही जामा मस्जिद से कुछ ही दूरी पर है, जहां 24 नवंबर को अदालत के आदेश पर हुए सर्वेक्षण के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार लोग मारे गए थे ।

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।