गाजीपुर, 2 अप्रैल 2025 – किसे पता था कि जो युवा अपने भविष्य के सपने संजोए सफर पर निकला था, उसकी यात्रा कभी पूरी नहीं होगी? प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बिंदु पाल (पुत्र गणेश पाल, ग्राम देवढी, पोस्ट दाऊदपुर, जिला गाजीपुर) की बुधवार को सैदपुर रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई।
सपनों से भरा सफर, जो मौत की मंज़िल पर खत्म हुआ
बिंदु पाल इलाहाबाद (प्रयागराज) जा रहा था, जहां वह अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था। लेकिन इस बार उसका सफर मंज़िल तक नहीं पहुंच सका। बताया जा रहा है कि ट्रेन में सीट न मिलने के कारण वह गेट पर बैठा था। थकान और नींद ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया और जैसे ही ट्रेन तेज़ गति से आगे बढ़ी, वह संतुलन खो बैठा और नीचे गिर गया। तेज़ रफ्तार ट्रेन ने उसे कुचल दिया और उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
घर में मचा कोहराम, मां बोली – “बेटा, तू इलाहाबाद जाने निकला था… वापस क्यों नहीं आया?”
जब यह मनहूस खबर बिंदु पाल के घर पहुंची, तो पूरा परिवार सदमे में आ गया। मां की चीखें पूरे गांव में गूंज उठीं, पिता गणेश पाल की आंखों में बेजान सा दर्द था, और बहन बार-बार बेहोश हो रही थी। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने परिवार को संभालने की कोशिश की, लेकिन यह ऐसा घाव था जो शायद कभी नहीं भरेगा।
मौके पर पहुंचे समाजसेवी अभिषेक साहा, शव को किया बरामद
हादसे की खबर मिलते ही समाजसेवी अभिषेक साहा तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने क्षत-विक्षत शव को समेटकर स्थानीय प्रशासन को सूचना दी और परिजनों को खबर दी। उनकी त्वरित सहायता से स्थिति को संभालने में मदद मिली।
रेलवे प्रशासन पर फिर उठे सवाल
इस हृदयविदारक हादसे ने फिर से रेलवे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों का कहना है कि ट्रेन में बैठने की उचित व्यवस्था न होने और पर्याप्त जागरूकता के अभाव में लोग गेट पर बैठने को मजबूर होते हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।
क्या यह हादसा रोका जा सकता था?
अगर –
✔ ट्रेन में बैठने की सही व्यवस्था होती,
✔ यात्रियों को उचित जागरूकता दी जाती,
✔ सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते,
तो शायद आज बिंदु पाल जिंदा होता।
यात्रियों के लिए जरूरी सावधानियां
✅ कभी भी ट्रेन के गेट पर न बैठें।
✅ सफर के दौरान पूरी तरह सतर्क रहें।
✅ अगर कोई व्यक्ति लापरवाही करता दिखे तो उसे सतर्क करें।
✅ रेलवे प्रशासन से बेहतर सुविधाओं की मांग करें।
बिंदु पाल का सपना था प्रतियोगी परीक्षा पास कर अपने परिवार का सहारा बनना, लेकिन उसकी कहानी अधूरी रह गई। क्या यह सिस्टम किसी और के सपनों को इस तरह टूटने से बचा सकता है?