प्रकाशक: आवाज़ न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट
जौनपुर।
स्वास्थ्य सेवा का निजीकरण और प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी अब आम जनता के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। गरीब और मध्यम वर्ग का मरीज, इलाज के नाम पर लुटता जा रहा है। इसी के खिलाफ अब आवाज़ उठ रही है—एक सख्त कानून की आवाज़।
क्या है जनता की मांग?
देश भर में स्वास्थ्य सेवा को लेकर बढ़ रही नाराजगी के बीच आम जनता यह मांग कर रही है कि सरकार एक स्वास्थ्य सेवा पारदर्शिता विधेयक लाए, जो डॉक्टरों, अस्पतालों और दवा कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगाए। इस कानून के माध्यम से निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल करने की मांग की गई है:
1. दवाओं की कीमत पर नियंत्रण:
जरूरी दवाओं का MRP सरकार तय करे ताकि कोई मरीज लुटा न जाए।
2. इलाज और जांच की तय दरें:
सभी प्राइवेट अस्पतालों को इलाज और जांच की दरें सार्वजनिक करनी हों।
3. अनावश्यक टेस्ट और ऑपरेशन पर रोक:
डॉक्टरों द्वारा कमीशन के लालच में कराए जाने वाले फर्जी इलाज पर सख्त सज़ा तय हो।
4. स्वास्थ्य सेवा निगरानी आयोग:
एक स्वतंत्र आयोग बने जो स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी करे और शिकायतों का त्वरित समाधान करे।
5. इमरजेंसी में इलाज पहले, बिल बाद में:
किसी भी मरीज को पहले इलाज और बाद में बिल देने की गारंटी मिले।
6. स्वास्थ्य बीमा का सार्वभौमिक लागूकरण:
सभी अस्पतालों में सरकारी बीमा योजनाओं को अनिवार्य किया जाए।
7. डॉक्टर और अस्पतालों की जवाबदेही:
लापरवाही और ठगी पर डॉक्टरों की डिग्री व अस्पताल की मान्यता रद्द करने का प्रावधान हो।
आवाज़ न्यूज़ की पहल
आवाज़ न्यूज़ आम जनता के इस संघर्ष और मांग का समर्थन करता है। हम सरकार से अपील करते हैं कि इस दिशा में तत्काल प्रभाव से गंभीर कदम उठाए जाएं और आम जनता को स्वास्थ्य सेवा के नाम पर लूट से राहत दी जाए।