
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 31 अगस्त को तियानजिन, चीन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के इतर एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की। यह मुलाकात करीब 50-55 मिनट तक चली और 10 महीने में दोनों नेताओं की पहली औपचारिक मुलाकात थी।

पिछली बार दोनों अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे। इस वार्ता का महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि यह अमेरिका द्वारा भारत और चीन पर लगाए गए 50% टैरिफ के कारण उत्पन्न तनाव के बीच हुई।
मुख्य बिंदु
- आर्थिक और सीमा मुद्दों पर चर्चा: दोनों नेताओं ने भारत-चीन आर्थिक संबंधों की समीक्षा की और पूर्वी लद्दाख में 2020 के गलवां घाटी संघर्ष के बाद तनावग्रस्त संबंधों को सामान्य करने पर विचार-विमर्श किया। हाल के महीनों में दोनों देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने, डेमचोक और दपसांग जैसे अंतिम घर्षण बिंदुओं से सैन्य वापसी, सीधी उड़ानें बहाल करने, और सीमा व्यापार शुरू करने जैसे कदम उठाए हैं।
- वैश्विक स्थिरता पर जोर: पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और सौहार्दपूर्ण संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने “विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता” को द्विपक्षीय संबंधों का आधार बताया। शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों का एक साथ आना, “ड्रैगन और हाथी का एकजुट होना”, वैश्विक बहुध्रुवीय व्यवस्था को बढ़ावा देगा।
- कैलाश मानसरोवर यात्रा और उड़ानें: मोदी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि 2.8 अरब लोगों के हित इन सहयोगों से जुड़े हैं।
- अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव: यह मुलाकात अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ (जिसमें रूस से तेल खरीदने के लिए 25% अतिरिक्त टैरिफ शामिल है) और चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे के बीच हुई। भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा मार्च 2025 तक 99.2វ,113.45 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इस स्थिति में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया गया।
एससीओ शिखर सम्मेलन और अन्य मुलाकातें
मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने तियानजिन पहुंचे। इस दौरान वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं से भी मिलेंगे। सम्मेलन में पाकिस्तान, नेपाल, मालदीव, और अन्य देशों के नेता भी शामिल हैं। यह एससीओ का अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन है, जिसमें 20 से अधिक वैश्विक नेता हिस्सा ले रहे हैं।
भारत-चीन संबंधों में सुधार
हाल के महीनों में दोनों देशों ने तनाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें 21 अक्टूबर 2024 को डेमचोक और दपसांग में सैन्य वापसी का समझौता शामिल है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी की हालिया भारत यात्रा के बाद दोनों पक्षों ने सीमा व्यापार, पर्यटक वीजा, और लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का फैसला किया।
व्यापक भू-राजनीतिक महत्व
यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव के बीच हुई, जो अमेरिका के टैरिफ और भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण उत्पन्न हुआ है। भारत की क्वाड (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के साथ साझेदारी के बावजूद, वह वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को संतुलित करने के लिए चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
क्या उम्मीद की जा सकती है?
हालांकि बड़े नीतिगत बदलाव की संभावना कम है, लेकिन यह मुलाकात दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों नेताओं ने सीमा प्रबंधन पर विशेष प्रतिनिधियों की बैठक को जल्द आयोजित करने पर सहमति जताई, ताकि सीमा पर शांति और समाधान की दिशा में काम किया जा सके।
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