
जम्मू-कश्मीर के रियासी और रामबन जिलों में 30 अगस्त को प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई, जिसमें कुल 11 लोगों की जान चली गई। रियासी जिले के माहौर क्षेत्र के बदर गांव में शनिवार तड़के भूस्खलन ने एक परिवार के सात सदस्यों को मलबे में दबा दिया, वहीं रामबन जिले के राजगढ़ तहसील में बादल फटने से चार लोगों की मौत हो गई और एक महिला लापता है।

रियासी में भूस्खलन: एक परिवार का अंत
रियासी के बदर गांव में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में एक कच्चा मकान ढह गया, जिसमें नजीर अहमद, उनकी पत्नी वजीरा बेगम, और उनके पांच बेटों—बिलाल अहमद (13 वर्ष), मोहम्मद मुस्तफा (11 वर्ष), मोहम्मद आदिल (8 वर्ष), मोहम्मद मुबारक (6 वर्ष), और मोहम्मद वसीम (5 वर्ष)—की मौत हो गई। हादसा इतना अचानक था कि परिवार को चिल्लाने तक का मौका नहीं मिला। स्थानीय लोगों को देर रात तेज आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किए। सुबह 3 बजे तक प्रशासन, पुलिस, और एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं और मलबे से सातों शव बरामद किए। क्षेत्र में सड़क मार्ग न होने के कारण बचाव कार्य में कठिनाइयां आईं।
रामबन में बादल फटने से तबाही
रामबन के राजगढ़ तहसील के गडग्राम कुमाटे गांव में शुक्रवार देर रात बादल फटने से अचानक बाढ़ और मलबे ने कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा में अश्विनी शर्मा (24), द्वारका नाथ (55), वीरता देवी (26), और ओम राज (38) की मौत हो गई, जबकि विद्या देवी (55) लापता है। तेज बहाव में दो मकान, एक प्राथमिक विद्यालय, और एक गौशाला बह गए। स्थानीय लोगों ने रात में ही राहत कार्य शुरू किए, और सुबह उपायुक्त मोहम्मद अलयास खान और एसएसपी अरुण गुप्ता ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ बचाव अभियान चलाया। लापता महिला की तलाश जारी है।
प्रशासन और राहत कार्य
रामबन और रियासी में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत केंद्र बनाए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रामबन के उपायुक्त से बात कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, “लगातार बारिश को देखते हुए मौसम एडवाइजरी का सख्ती से पालन करना चाहिए। प्रशासन और विभागों को सतर्क रहने और जानमाल की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।”
बार-बार की आपदाएं
जम्मू-कश्मीर में अगस्त 2025 में प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला थम नहीं रहा है। इससे पहले 14 अगस्त को किश्तवाड़ के चिशोटी गांव में बादल फटने से 65 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर मचैल माता यात्रा के श्रद्धालु थे। 17 अगस्त को कठुआ में बाढ़ से सात लोग मारे गए, और 26 अगस्त को वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन में 34 तीर्थयात्रियों की जान चली गई। मौसम विभाग ने भारी बारिश और बादल फटने की चेतावनी पहले ही जारी की थी, लेकिन दुर्गम इलाकों और बदलते मौसम पैटर्न ने आपदा प्रबंधन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
चुनौतियां और भविष्य
जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही हैं। जम्मू-कश्मीर में सड़कों, पुलों, और संचार व्यवस्था को हुए नुकसान ने राहत कार्यों को और जटिल कर दिया है। प्रशासन ने लोगों से ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है।
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