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उत्तराखंड हिमस्खलन: फंसे हुए 4 लोगों को बचाने के लिए अभियान जारी, तैनात किए जाएंगे ड्रोन

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उत्तराखंड के चमोली में माना गांव के पास बीआरओ कैंप में भीषण हिमस्खलन हुआ, जिसमें 54 मजदूर दब गए। बचाव दल ने 50 को बचा लिया है, लेकिन चार की मौत हो गई। उन्नत तकनीक और हवाई सहायता का उपयोग करके चार लापता मजदूरों की तलाश जारी है।

उत्तराखंड के चमोली जिले में माना गांव के पास सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के शिविर में भारी हिमस्खलन हुआ, जिससे 54 मजदूर बर्फ में दब गए। बचाव दल ने अब तक 50 लोगों को बचा लिया है, लेकिन चार मजदूरों की दुखद मौत हो गई। शेष चार लापता मजदूरों की तलाश जारी है, उन्हें खोजने के लिए कई एजेंसियां ​​उन्नत तकनीक और हवाई सहायता का उपयोग कर रही हैं।

चमोली में बचाव प्रयासों पर शीर्ष 10 अपडेट

  • हिमस्खलन से प्रभावित बीआरओ कैंप से कुल 50 मजदूरों को बचाया गया है। दुखद बात यह है कि इनमें से चार की मौत हो गई – एक की ज्योतिर्मठ में इलाज के दौरान और तीन की बद्रीनाथ-माणा में।मृतकों की पहचान हिमाचल प्रदेश के मोहिंद्र पाल और जितेंद्र सिंह, उत्तर प्रदेश के मंजीत यादव और उत्तराखंड के आलोक यादव के रूप में हुई है। अधिकारी अब चार लापता मजदूरों- हिमाचल प्रदेश के हरमेश चंद, उत्तर प्रदेश के अशोक और उत्तराखंड के अनिल कुमार और अरविंद सिंह- का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
  • शुक्रवार को भारी बर्फबारी और बारिश के कारण बचाव कार्य बाधित हुआ, जिसके कारण रात भर अभियान स्थगित करना पड़ा। हालांकि, रविवार को मौसम साफ होने के कारण अभियान की गति बढ़ गई है।
  • भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के कर्मी लापता श्रमिकों का पता लगाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। 200 से अधिक कर्मी उच्च तीव्रता वाले बचाव अभियान में लगे हुए हैं।
  • शुरुआत में पांच मजदूरों के लापता होने की सूचना मिली थी। लेकिन हिमाचल प्रदेश के सुनील कुमार किसी तरह सुरक्षित घर पहुंच गए, जिससे लापता मजदूरों की संख्या घटकर चार रह गई।
  • हिमस्खलन के कारण बीआरओ कैंप में आठ श्रमिक आवास (कंटेनर) दब गए। इनमें से पांच पहले ही मिल गए थे, जबकि शेष तीन अब मिल गए हैं। दुर्भाग्य से, इनमें कोई भी श्रमिक नहीं मिला, जिससे लापता श्रमिकों के भाग्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
  • दबे हुए लोगों का पता लगाने के लिए विक्टिम लोकेटिंग कैमरा (वीएलसी), थर्मल इमेजिंग कैमरा, ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार (दिल्ली से मंगाया गया) और हिमस्खलन बचाव कुत्तों जैसे विशेष बचाव उपकरण तैनात किए गए हैं। अगर मौसम अनुकूल रहा तो खोज में ड्रोन, क्वाडकॉप्टर और मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
  • बचाव कार्य में छह हेलीकॉप्टर लगे हुए हैं, जिनमें तीन आर्मी एविएशन कोर के, दो भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के और एक सेना द्वारा किराए पर लिया गया सिविल हेलीकॉप्टर शामिल है। भारतीय वायु सेना के चीता हेलीकॉप्टर घायल श्रमिकों को जोशीमठ के आर्मी अस्पताल में पहुंचाने का काम जारी रखे हुए हैं।
  • हिमस्खलन के कारण बद्रीनाथ-जोशीमठ राजमार्ग 15-20 स्थानों पर अवरुद्ध हो गया, जिससे बचाव दलों के लिए सड़क मार्ग से घटनास्थल तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया। नतीजतन, सेना और भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर बचावकर्मियों और उपकरणों को ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
  • मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और उत्तर भारत के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा हिमस्खलन स्थल पर पहुंच गए हैं और ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल सेनगुप्ता के अनुसार, बर्फ के कारण सड़क तक पहुंचना अभी भी मुश्किल है, जिससे बचाव कार्य और भी जटिल हो गया है।
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमस्खलन स्थल का हवाई सर्वेक्षण किया और बचाव दल की त्वरित कार्रवाई की प्रशंसा की। उन्होंने अधिकारियों को युद्ध स्तर पर खोज जारी रखने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्थिति की जानकारी ली और केंद्रीय एजेंसियों से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।