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खड़गे ने की चुनाव नियमों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना, कहा ‘चुनाव आयोग की ईमानदारी को…’

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नियम 93 के अनुसार, चुनाव से संबंधित सभी “कागज़ात” सार्वजनिक निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे। संशोधन में “कागज़ातों” के बाद “इन नियमों में निर्दिष्ट अनुसार” जोड़ा गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को मोदी सरकार पर कुछ इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की सार्वजनिक जांच को रोकने के लिए चुनाव नियम में बदलाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम चुनाव आयोग की संस्थागत अखंडता को नष्ट करने की सरकार की “सुनियोजित साजिश” का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा चुनाव आयोग की निष्ठा को “सुनियोजित तरीके से नष्ट करना” संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला है।यह आलोचना तब हुई है जब सरकार ने चुनाव नियमों में कुछ बदलाव किए हैं, ताकि सीसीटीवी कैमरा और वेबकास्टिंग फुटेज तथा उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे कुछ इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के सार्वजनिक निरीक्षण पर रोक लगाई जा सके, ताकि उनका दुरुपयोग रोका जा सके।

विवादास्पद मानदंड क्या था?

भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की सिफारिश के आधार पर, केंद्रीय कानून मंत्रालय ने शुक्रवार को चुनाव नियम, 1961 के नियम 93(2)(ए) में संशोधन किया, ताकि सार्वजनिक निरीक्षण के लिए खुले “कागजात” या दस्तावेजों के प्रकार को प्रतिबंधित किया जा सके।

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “चुनाव नियमों के संचालन में मोदी सरकार का दुस्साहसिक संशोधन भारत के चुनाव आयोग की संस्थागत अखंडता को नष्ट करने की उसकी व्यवस्थित साजिश में एक और हमला है। इससे पहले, उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश को चयन पैनल से हटा दिया था जो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करता है, और अब उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी चुनावी जानकारी को रोकने का सहारा लिया है।”

खड़गे ने कहा कि जब भी कांग्रेस पार्टी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और ईवीएम में पारदर्शिता की कमी जैसी विशिष्ट चुनाव अनियमितताओं के बारे में चुनाव आयोग को पत्र लिखा है, तो चुनाव आयोग ने तिरस्कारपूर्ण लहजे में जवाब दिया है और कुछ गंभीर शिकायतों को स्वीकार भी नहीं किया है।

उन्होंने कहा, “इससे यह पुनः सिद्ध होता है कि निर्वाचन आयोग, भले ही वह अर्ध-न्यायिक निकाय है, स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर रहा है।”

खड़गे ने कहा, “मोदी सरकार द्वारा चुनाव आयोग की निष्ठा को जानबूझकर नष्ट करना संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला है तथा हम उनकी सुरक्षा के लिए हर कदम उठाएंगे।”कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने कहा था कि पार्टी इस संशोधन को कानूनी तौर पर चुनौती देगी।

लोकसभा सांसद और कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने अब तक अपने कामकाज में अस्पष्टता और सरकार समर्थक रवैया अपनाया है।मानदंड में बदलाव पर ईसीआई का रुख क्या है?

विधि मंत्रालय और चुनाव आयोग के अधिकारियों ने अलग-अलग बताया कि संशोधन के पीछे एक अदालती मामला ही “ट्रिगर” था।

यद्यपि नामांकन फार्म, चुनाव एजेंटों की नियुक्ति, परिणाम और चुनाव खाता विवरण जैसे दस्तावेजों का उल्लेख चुनाव संचालन नियमों में किया गया है, लेकिन आदर्श आचार संहिता अवधि के दौरान सीसीटीवी कैमरा फुटेज, वेबकास्टिंग फुटेज और उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज इसके दायरे में नहीं आते हैं।

चुनाव आयोग के एक पूर्व अधिकारी ने बताया, “सीसीटीवी कवरेज, मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग चुनाव आचार संहिता के तहत नहीं की जाती है, बल्कि यह चुनाव आयोग द्वारा समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का परिणाम है।”

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नीरज यादव स्वतंत्र आवाज़ न्यूज़ के संस्थापक , संपादक हैं । वह डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म आवाज़ न्यूज़ के लिए निष्पक्ष और जमीर वाली पत्रकारिता के सृजन में अपना सहयोग कर रहे हैं ।