रचना : मोहन लाल यादव

आवा अमरित काल मनाई
मड़ही पे झंडा फहराई
फटा सुथन्ना पहिन के आव
भूख प्यास रोटी बिसराव
आव बबलुआ दौड़िके आ
आँखी मीज ना पेट दबा
झंडा बहुत पियारा बा
सारे जग से न्यारा बा
जन गण मन अधिनायक गाई
आवा अमरित काल मनाई
नेहरु चाचा के दुरिआव
भगत पे देशद्रोह लगवाव
चंद्रशेखर के अब का काम
भए सुभाष चंद बेदाम
राष्ट्रद्रोह के करौ न काम
जय जय बोलो नाथूराम
गान्ही बाबा के बिसराई
आवा अमरित काल मनाई
आवा काका काकी आवा
मत कर झांकी झांकी आवा
रोवहुं न मंहगाई पे
मंहगी भई दवाई पे
बदहाली के फिकिर न कर
रोजगार के जिकिर न कर
मूड़े करजा देहुं भुलाई
आवा अमरित काल मनाई
महंगी बिजली महंगा तेल
ई सब राष्ट्रवाद के खेल
खतरा खेत किसानी पे
टैक्स हवा अउ पानी पे
राजा बड़ा खिलाड़ी बा
हाथे धरम कुल्हाड़ी बा
ढोवौ कांवर छोड़ पढ़ाई
आवा अमरित काल मनाई
दशा देश के बा अति दीन
देखि तिरंगा भ गमगीन
रोए से न काम चली
बिन आगी ना दाल गली
भगत सिंह के ई पैगाम
इंकलाब के झंडा धाम
तबै आजादी फिर से आई
तबै आजादी फिर से आई

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